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-:किताब के बारे में:-
इतिहास में किसी भी जन समुदाय का जब भी नरसंहार हुआ है, तो भविष्य को सुरक्षित करने के लिए बाकि बचे लोग कुछ परिवर्तन करते हैं, अपने विचारों में, जीवन शैली में। पिछले हजार वर्षों में अनेक आघात झेलने के बावजूद आज भी अधिकांश हिन्दू एक दुविधा में जीते प्रतीत होते हैं- आत्मरक्षा और अहिंसा के बीच संतुलन कैसे स्थापित हो?
"हिंदू ओजशाला" इसी प्रश्न के उत्तर की खोज में जन्मी एक ओजस्वी काव्य-यात्रा है, जो पाठक को अपने इतिहास, वर्तमान और संभावित भविष्य से अवगत कराती है। यह कट्टरपंथीयों को अधर्म का त्याग कर मानवता के मार्ग पर लौटने की प्रेरणा भी देती है। धर्मांतरण, हिन्दू नरसंहार, घर वापसी जैसे ज्वलंत विषयों को विविध दृष्टिकोणों से समझते हुए संवेदनशीलता के साथ शब्दों में पिरोया गया है। "हिंदू ओजशाला" केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि आत्ममंथन का एक द्वार है-एक ऐसी पुकार, जो भीतर सोई हुई चेतना, साहस और सांस्कृतिक अस्मिता को जगाने का प्रयास करती है।
"हिन्दू ओजशाला" पुस्तक केवल हिन्दू को जगाने का प्रयास नहीं अपितु यह पूरी मानव जाति को अपने मूल स्वरूप को सोचने पर विवश करती प्रतीत होती है।
— शंकुतला काजल 'शकुन'
पूर्व अध्यक्ष, हिन्दी साहित्य प्रेरक संस्था (पंजीकृत), जींद (हरियाणा)
"यहाँ केवल तुकबंदी नहीं है, केवल शब्द भर नहीं हैं, मनोरंजन नहीं है, यहाँ हड़ौड़े सी कलम अत्याचारियों पर बरसती प्रतीत होती है और सोए हुए लोगों की आँखों पर अंगारे की तरह झुलसती प्रतीत होती है।"
— कमलेश गौतम
उपन्यासकार एवं लोककवयित्री
| ISBN 13 | 9789347691539 |
| Book Language | Hindi |
| Binding | Paperback |
| Publishing Year | 2026 |
| Total Pages | 172 |
| Edition | First |
| GAIN | TIPQ3XKBSKR |
| Publishers | Garuda Prakashan Pvt Ltd |
| Category | History |
| Weight | 170.00 g |
| Dimension | 14.00 x 22.00 x 1.10 |
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-:किताब के बारे में:-
इतिहास में किसी भी जन समुदाय का जब भी नरसंहार हुआ है, तो भविष्य को सुरक्षित करने के लिए बाकि बचे लोग कुछ परिवर्तन करते हैं, अपने विचारों में, जीवन शैली में। पिछले हजार वर्षों में अनेक आघात झेलने के बावजूद आज भी अधिकांश हिन्दू एक दुविधा में जीते प्रतीत होते हैं- आत्मरक्षा और अहिंसा के बीच संतुलन कैसे स्थापित हो?
"हिंदू ओजशाला" इसी प्रश्न के उत्तर की खोज में जन्मी एक ओजस्वी काव्य-यात्रा है, जो पाठक को अपने इतिहास, वर्तमान और संभावित भविष्य से अवगत कराती है। यह कट्टरपंथीयों को अधर्म का त्याग कर मानवता के मार्ग पर लौटने की प्रेरणा भी देती है। धर्मांतरण, हिन्दू नरसंहार, घर वापसी जैसे ज्वलंत विषयों को विविध दृष्टिकोणों से समझते हुए संवेदनशीलता के साथ शब्दों में पिरोया गया है। "हिंदू ओजशाला" केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि आत्ममंथन का एक द्वार है-एक ऐसी पुकार, जो भीतर सोई हुई चेतना, साहस और सांस्कृतिक अस्मिता को जगाने का प्रयास करती है।
"हिन्दू ओजशाला" पुस्तक केवल हिन्दू को जगाने का प्रयास नहीं अपितु यह पूरी मानव जाति को अपने मूल स्वरूप को सोचने पर विवश करती प्रतीत होती है।
— शंकुतला काजल 'शकुन'
पूर्व अध्यक्ष, हिन्दी साहित्य प्रेरक संस्था (पंजीकृत), जींद (हरियाणा)
"यहाँ केवल तुकबंदी नहीं है, केवल शब्द भर नहीं हैं, मनोरंजन नहीं है, यहाँ हड़ौड़े सी कलम अत्याचारियों पर बरसती प्रतीत होती है और सोए हुए लोगों की आँखों पर अंगारे की तरह झुलसती प्रतीत होती है।"
— कमलेश गौतम
उपन्यासकार एवं लोककवयित्री
| ISBN 13 | 9789347691539 |
| Book Language | Hindi |
| Binding | Paperback |
| Publishing Year | 2026 |
| Total Pages | 172 |
| Edition | First |
| GAIN | TIPQ3XKBSKR |
| Publishers | Garuda Prakashan Pvt Ltd |
| Category | History |
| Weight | 170.00 g |
| Dimension | 14.00 x 22.00 x 1.10 |
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