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-:किताब के बारे में:-
सम्राट पृथ्वीराज चौहान भारतीय इतिहास के उन महानायक व्यक्तित्वों में हैं, जिनकी वीरता, नेतृत्व और ऐतिहासिक विरासत ने सदियों से जनमानस को प्रेरित किया है। लंबे समय तक चंद बरदाई कृत पृथ्वीराज रासो को उनके जीवन का प्रमुख स्रोत माना जाता रहा, किंतु पृथ्वीराज विजय महाकाव्यम् की खोज के बाद उनकी जीवनी और इतिहास को लेकर नई बहसें प्रारंभ हुईं। भारतीय एवं पाश्चात्य इतिहासकारों ने इन ग्रंथों की प्रामाणिकता, ऐतिहासिकता तथा सीमाओं पर विभिन्न दृष्टिकोण प्रस्तुत किए हैं।
यह पुस्तक पृथ्वीराज चौहान से संबंधित मूल स्रोतों का समालोचनात्मक पुनर्परीक्षण करती है। इसमें संस्कृत एवं लोकभाषा परंपराओं में उपलब्ध तथ्यों, विरोधाभासों और उपेक्षित पक्षों का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। लेखक इतिहास लेखन में प्रचलित धारणाओं तथा पाश्चात्य आलोचनाओं की अंधस्वीकृति पर प्रश्न उठाते हुए यह दर्शाते हैं कि सांस्कृतिक राजनीति, क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा और विद्वत् पूर्वाग्रहों ने ऐतिहासिक आख्यानों को कैसे प्रभावित किया। पृथ्वीराज रासो और पृथ्वीराज विजय महाकाव्यम् के तुलनात्मक अध्ययन के माध्यम से यह कृति पृथ्वीराज चौहान के जीवन, व्यक्तित्व और योगदान का संतुलित, तथ्याधारित तथा चिंतनशील दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।
| ISBN 13 | 9789347691409 |
| Book Language | Hindi |
| Binding | Paperback |
| Publishing Year | 2026 |
| Total Pages | 128 |
| Edition | First |
| GAIN | M7RX0REN1Z1 |
| Publishers | Garuda Prakashan Pvt Ltd |
| Category | History Indian History |
| Weight | 110.00 g |
| Dimension | 13.00 x 21.00 x 1.00 |
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-:किताब के बारे में:-
सम्राट पृथ्वीराज चौहान भारतीय इतिहास के उन महानायक व्यक्तित्वों में हैं, जिनकी वीरता, नेतृत्व और ऐतिहासिक विरासत ने सदियों से जनमानस को प्रेरित किया है। लंबे समय तक चंद बरदाई कृत पृथ्वीराज रासो को उनके जीवन का प्रमुख स्रोत माना जाता रहा, किंतु पृथ्वीराज विजय महाकाव्यम् की खोज के बाद उनकी जीवनी और इतिहास को लेकर नई बहसें प्रारंभ हुईं। भारतीय एवं पाश्चात्य इतिहासकारों ने इन ग्रंथों की प्रामाणिकता, ऐतिहासिकता तथा सीमाओं पर विभिन्न दृष्टिकोण प्रस्तुत किए हैं।
यह पुस्तक पृथ्वीराज चौहान से संबंधित मूल स्रोतों का समालोचनात्मक पुनर्परीक्षण करती है। इसमें संस्कृत एवं लोकभाषा परंपराओं में उपलब्ध तथ्यों, विरोधाभासों और उपेक्षित पक्षों का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। लेखक इतिहास लेखन में प्रचलित धारणाओं तथा पाश्चात्य आलोचनाओं की अंधस्वीकृति पर प्रश्न उठाते हुए यह दर्शाते हैं कि सांस्कृतिक राजनीति, क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा और विद्वत् पूर्वाग्रहों ने ऐतिहासिक आख्यानों को कैसे प्रभावित किया। पृथ्वीराज रासो और पृथ्वीराज विजय महाकाव्यम् के तुलनात्मक अध्ययन के माध्यम से यह कृति पृथ्वीराज चौहान के जीवन, व्यक्तित्व और योगदान का संतुलित, तथ्याधारित तथा चिंतनशील दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।
| ISBN 13 | 9789347691409 |
| Book Language | Hindi |
| Binding | Paperback |
| Publishing Year | 2026 |
| Total Pages | 128 |
| Edition | First |
| GAIN | M7RX0REN1Z1 |
| Publishers | Garuda Prakashan Pvt Ltd |
| Category | History Indian History |
| Weight | 110.00 g |
| Dimension | 13.00 x 21.00 x 1.00 |
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₹239.00
जयानक कृत पृथ्वीराज विजय महाकाव्यम् : एक विवेचना | Jayanak Krit Prithviraj Vijay Mahakavyam: Ek Vivechana
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