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-:किताब के बारे में:-
भगवद्गीता इस देश की मानवता को दी गई महानतम उपहारों में से एक है। यह जीवन की वास्तविकताओं का सामना करने के लिए अमूल्य शिक्षाएँ प्रदान करती है, विशेषकर तब जब समय-समय पर कठिन परिस्थितियाँ और निर्णय लेने की दुविधाएँ सामने आती हैं। गीता के अठारह अध्याय तीन त्रयों में विभाजित हैं, जो उपनिषदों के महावाक्यों की व्याख्या करते हैं। दूसरा त्रय (अध्याय 7 से 12) महावाक्य "तत् त्वम् असि" के "तत्" पक्ष पर केंद्रित है। यही इस पुस्तक का मुख्य विषय है, जो "Timeless Gita Endless Bliss" श्रृंखला का दूसरा भाग है।
हमारी आध्यात्मिक यात्रा हमें भक्ति मार्ग की ओर ले जाती है, क्योंकि "मैं कौन हूँ?" यह जानने की जिज्ञासा बढ़ती जाती है। भगवान कृष्ण इस यात्रा में हमारा मार्गदर्शन करते हैं और बताते हैं कि सम्पूर्ण ब्रह्मांड उनकी ही अभिव्यक्ति है। वे विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से इसे स्पष्ट करते हैं, जिसे हम "दिव्यता के संरक्षण का नियम" कहते हैं। यह पुस्तक विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी संदेश प्रस्तुत करती है, जो अपने व्यावसायिक जीवन की व्यस्तता में संलग्न हैं।
| ISBN 13 | 9789347691003 |
| Book Language | Hindi |
| Binding | Paperback |
| Publishing Year | 2026 |
| Total Pages | 284 |
| Edition | First |
| Translated by | Anil Kumar Gupta |
| GAIN | I96FS70EG7D |
| Publishers | Garuda Prakashan Pvt Ltd |
| Category | Religion & Spirituality |
| Weight | 280.00 g |
| Dimension | 15.50 x 23.00 x 1.80 |
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-:किताब के बारे में:-
भगवद्गीता इस देश की मानवता को दी गई महानतम उपहारों में से एक है। यह जीवन की वास्तविकताओं का सामना करने के लिए अमूल्य शिक्षाएँ प्रदान करती है, विशेषकर तब जब समय-समय पर कठिन परिस्थितियाँ और निर्णय लेने की दुविधाएँ सामने आती हैं। गीता के अठारह अध्याय तीन त्रयों में विभाजित हैं, जो उपनिषदों के महावाक्यों की व्याख्या करते हैं। दूसरा त्रय (अध्याय 7 से 12) महावाक्य "तत् त्वम् असि" के "तत्" पक्ष पर केंद्रित है। यही इस पुस्तक का मुख्य विषय है, जो "Timeless Gita Endless Bliss" श्रृंखला का दूसरा भाग है।
हमारी आध्यात्मिक यात्रा हमें भक्ति मार्ग की ओर ले जाती है, क्योंकि "मैं कौन हूँ?" यह जानने की जिज्ञासा बढ़ती जाती है। भगवान कृष्ण इस यात्रा में हमारा मार्गदर्शन करते हैं और बताते हैं कि सम्पूर्ण ब्रह्मांड उनकी ही अभिव्यक्ति है। वे विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से इसे स्पष्ट करते हैं, जिसे हम "दिव्यता के संरक्षण का नियम" कहते हैं। यह पुस्तक विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी संदेश प्रस्तुत करती है, जो अपने व्यावसायिक जीवन की व्यस्तता में संलग्न हैं।
| ISBN 13 | 9789347691003 |
| Book Language | Hindi |
| Binding | Paperback |
| Publishing Year | 2026 |
| Total Pages | 284 |
| Edition | First |
| Translated by | Anil Kumar Gupta |
| GAIN | I96FS70EG7D |
| Publishers | Garuda Prakashan Pvt Ltd |
| Category | Religion & Spirituality |
| Weight | 280.00 g |
| Dimension | 15.50 x 23.00 x 1.80 |
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