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-:किताब के बारे में:-
दुनिया की सबसे बड़ी जनसंख्या वाले देश के लिए सबसे बड़ी चुनौती है अपने नागरिकों को रोजगार, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा के अवसर और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना. भारत के नागरिकों के हिस्से के संसाधनों में सेंध लगा रहे हैं, फर्जी पहचान पत्र की आड़ में छिपे घुसपैठिए. दुनिया में ऐसा कौन सा देश है, जहां करोड़ों घुसपैठिए फैले हों? घुसपैठियों का भारत में होना भारतीय लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों पर प्रहार है. विशेषकर तब, जब वे फर्जी वोटर बनकर भारत की चुनावी राजनीति को प्रभावित करने लगते हैं. इसके अलावा घुसपैठिए पर्यावरण से जुड़ी तमाम समस्याएं भी पैदा करते हैं. घुसपैठ को समाप्त करने में जनता ही भारत की सबसे बड़ी ताकत बनेगी. विस्तार से जानने के लिए पुस्तक के पन्ने पलटिए!
"इस संवेदनशील व राष्ट्रीय महत्व के मुद्दे पर पूर्णिमा का निरंतर और गंभीर कार्य वास्तव में सराहनीय है."
— शशांक, पूर्व विदेश सचिव
"घुसपैठ की राष्ट्रीय समस्या पर अध्ययन, मनन और गहरे अन्वेषण से भरी-पूरी है यह पुस्तक."
— रामबहादुर राय, अध्यक्ष, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र
"पुस्तक में विश्वसनीय स्रोतों और डेटा से उभरती तस्वीर पाठकों को सोचने के लिए बाध्य करती है."
— एनएस जामवाल, पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक, सीमा सुरक्षा बल
"पूर्णिमा ने तथ्यों सहित समस्या को गहराई से पकड़ा है. उम्मीद है यह किताब हम सबको जगाएगी."
— प्रो गोविंद सिंह, पूर्व डीन, अकादमिक, आईआईएमसी
"पूर्णिमा ने घुसपैठ की जटिल समस्या का न केवल विश्लेषण किया, बल्कि ठोस समाधान भी सामने रखे हैं."
— आशा खोसा, वरिष्ठ पत्रकार
"यह पुस्तक लेखिका के गहन शोध और विषय के प्रति समर्पण का परिणाम है."
— प्रणव सिरोही, सीनियर डिप्टी एडिटर, दैनिक जागरण
| ISBN 13 | 9789347691904 |
| Book Language | Hindi |
| Binding | Paperback |
| Publishing Date | 2026-04-22 |
| Publishing Year | 2026 |
| Total Pages | 176 |
| Edition | First |
| GAIN | P846SMW1FIS |
| Publishers | Garuda Prakashan Pvt Ltd |
| Category | Politics Freedom & Security Books |
| Weight | 170.00 g |
| Dimension | 13.00 x 21.00 x 1.10 |
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-:किताब के बारे में:-
दुनिया की सबसे बड़ी जनसंख्या वाले देश के लिए सबसे बड़ी चुनौती है अपने नागरिकों को रोजगार, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा के अवसर और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना. भारत के नागरिकों के हिस्से के संसाधनों में सेंध लगा रहे हैं, फर्जी पहचान पत्र की आड़ में छिपे घुसपैठिए. दुनिया में ऐसा कौन सा देश है, जहां करोड़ों घुसपैठिए फैले हों? घुसपैठियों का भारत में होना भारतीय लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों पर प्रहार है. विशेषकर तब, जब वे फर्जी वोटर बनकर भारत की चुनावी राजनीति को प्रभावित करने लगते हैं. इसके अलावा घुसपैठिए पर्यावरण से जुड़ी तमाम समस्याएं भी पैदा करते हैं. घुसपैठ को समाप्त करने में जनता ही भारत की सबसे बड़ी ताकत बनेगी. विस्तार से जानने के लिए पुस्तक के पन्ने पलटिए!
"इस संवेदनशील व राष्ट्रीय महत्व के मुद्दे पर पूर्णिमा का निरंतर और गंभीर कार्य वास्तव में सराहनीय है."
— शशांक, पूर्व विदेश सचिव
"घुसपैठ की राष्ट्रीय समस्या पर अध्ययन, मनन और गहरे अन्वेषण से भरी-पूरी है यह पुस्तक."
— रामबहादुर राय, अध्यक्ष, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र
"पुस्तक में विश्वसनीय स्रोतों और डेटा से उभरती तस्वीर पाठकों को सोचने के लिए बाध्य करती है."
— एनएस जामवाल, पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक, सीमा सुरक्षा बल
"पूर्णिमा ने तथ्यों सहित समस्या को गहराई से पकड़ा है. उम्मीद है यह किताब हम सबको जगाएगी."
— प्रो गोविंद सिंह, पूर्व डीन, अकादमिक, आईआईएमसी
"पूर्णिमा ने घुसपैठ की जटिल समस्या का न केवल विश्लेषण किया, बल्कि ठोस समाधान भी सामने रखे हैं."
— आशा खोसा, वरिष्ठ पत्रकार
"यह पुस्तक लेखिका के गहन शोध और विषय के प्रति समर्पण का परिणाम है."
— प्रणव सिरोही, सीनियर डिप्टी एडिटर, दैनिक जागरण
| ISBN 13 | 9789347691904 |
| Book Language | Hindi |
| Binding | Paperback |
| Publishing Date | 2026-04-22 |
| Publishing Year | 2026 |
| Total Pages | 176 |
| Edition | First |
| GAIN | P846SMW1FIS |
| Publishers | Garuda Prakashan Pvt Ltd |
| Category | Politics Freedom & Security Books |
| Weight | 170.00 g |
| Dimension | 13.00 x 21.00 x 1.10 |
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