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गीत गोविंद संस्कृत के महान कवि जयदेव द्वारा रचित एक अमर काव्य ग्रंथ है। यह ग्रंथ भगवान श्रीकृष्ण और राधा के दिव्य प्रेम, विरह, मिलन तथा भक्ति-भाव का अत्यंत मधुर और भावपूर्ण वर्णन करता है। इसका रचनाकाल 12वीं शताब्दी माना जाता है।

इस काव्य में राधा और कृष्ण के प्रेम को केवल सांसारिक प्रेम के रूप में नहीं, बल्कि जीवात्मा और परमात्मा के आध्यात्मिक मिलन के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। गीत गोविंद 12 सर्गों (अध्यायों) और 24 अष्टपदियों में विभाजित है, जिन्हें संगीत और गायन के लिए रचा गया था।

पुस्तक की भाषा अत्यंत काव्यात्मक, मधुर और रसपूर्ण है। इसमें श्रृंगार रस और भक्ति रस का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य तथा वैष्णव भक्ति परंपरा पर इसका गहरा प्रभाव रहा है

गीत गोविंद महाकवि जयदेव द्वारा रचित एक प्रसिद्ध संस्कृत काव्य है, जिसमें राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम, विरह और पुनर्मिलन का मनोहारी वर्णन किया गया है। यह ग्रंथ भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संगम है। इसकी अष्टपदियाँ भारतीय संगीत और नृत्य परंपरा में विशेष स्थान रखती हैं तथा भक्तिकालीन साहित्य की अमूल्य धरोहर मानी जाती हैं।

Product Details
ISBN 13 9789349289369
Book Language Hindi
Binding Paperback
Total Pages 168
Edition 2026
Publisher Surya Bharti Prakashan
Author Jaydev Krit
GAIN 6DGRD049IGD
Category Religion & Spirituality   All Books  
Weight 250.00 g

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गीत गोविंद संस्कृत के महान कवि जयदेव द्वारा रचित एक अमर काव्य ग्रंथ है। यह ग्रंथ भगवान श्रीकृष्ण और राधा के दिव्य प्रेम, विरह, मिलन तथा भक्ति-भाव का अत्यंत मधुर और भावपूर्ण वर्णन करता है। इसका रचनाकाल 12वीं शताब्दी माना जाता है।

इस काव्य में राधा और कृष्ण के प्रेम को केवल सांसारिक प्रेम के रूप में नहीं, बल्कि जीवात्मा और परमात्मा के आध्यात्मिक मिलन के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। गीत गोविंद 12 सर्गों (अध्यायों) और 24 अष्टपदियों में विभाजित है, जिन्हें संगीत और गायन के लिए रचा गया था।

पुस्तक की भाषा अत्यंत काव्यात्मक, मधुर और रसपूर्ण है। इसमें श्रृंगार रस और भक्ति रस का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य तथा वैष्णव भक्ति परंपरा पर इसका गहरा प्रभाव रहा है

गीत गोविंद महाकवि जयदेव द्वारा रचित एक प्रसिद्ध संस्कृत काव्य है, जिसमें राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम, विरह और पुनर्मिलन का मनोहारी वर्णन किया गया है। यह ग्रंथ भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संगम है। इसकी अष्टपदियाँ भारतीय संगीत और नृत्य परंपरा में विशेष स्थान रखती हैं तथा भक्तिकालीन साहित्य की अमूल्य धरोहर मानी जाती हैं।

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ISBN 13 9789349289369
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Total Pages 168
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