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Ramayan Ki Padchhap: Dakshin-Poorva Asia ki Virasat aur Sanskriti me Ramkatha
by   Anita Bose (Author)  
by   Anita Bose (Author)   (show less)
Ramayan Ki Padchaap
Product Description

-:किताब के बारे में:-

रामायण केवल एक महाकाव्य नहीं, बल्कि एशिया की सांस्कृतिक स्मृति का एक जीवंत और गतिशील हिस्सा है। भारत से दक्षिण-पूर्व एशिया तक इसकी यात्रा ने विभिन्न समाजो की कला, साहित्य, नृत्य, रंगमंच, लोकपरंपराओं, धार्मिक आस्थाओं और सांस्कृतिक विरासत को गहराई से प्रभावित किया है।

रामायण की पदचाप इसी व्यापक सांस्कृतिक यात्रा का अध्ययन प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक थाईलैंड, इंडोनेशिया, कंबोडिया, लाओस ओर दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य क्षेत्रों में रामकथा के विविध रूपों और स्थानीय रूपांतरणों को सामने लाती है। यहाँ रामायण किसी एक स्थिर कथा के रूप में नहीं, बल्कि स्थानीय समाजों द्वारा निरंतर पुनसृजित और आत्मसात की गई जीवंत परंपरा के रूप में दिखाई देती है।

भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच सदियों से विकसित सांस्कृतिक संवाद, साझा विरासत तथा पारस्परिक प्रभावों की गहन पड़ताल करते हुए, यह पुस्तक व्यापक और समग्र परिप्रेक्ष्य सामने लाता है।

"यह एक एक उत्कृष्ट और अत्यंत रोचक पुस्तक है, जो सरल एवं प्रवाहपूर्ण शैली में दक्षिण-पूर्व एशिया में रामायण की अ‌द्भुत यात्रा को प्रस्तुत करती है। इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, म्यांमार और वियतनाम की दुर्लभ रामायण परंपराओं को यह पुस्तक सुंदर ढंग से सामने लाती है।"

- डॉ. यू-तैन वोंगसाथित, सिलपाकोर्न विश्वविद्यालय, थाईलैंड

"इस विषय-वस्तु के प्रति आपकी अत्यंत व्यक्तिगत और आत्मीय प्रतिक्रिया ताज़गीपूर्ण है तथा विद्वत्तापूर्ण प्रकाशनों के पारंपरिक दृष्टिकोण से बिल्कुल अलग है।"

- प्रो. जे. एल. ब्रॉकिंगटन, एडिनबर्ग विश्वविद्यालय, स्कॉटलैंड

"यह पुस्तक भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच रामायण द्वारा निर्मित अटूट सांस्कृतिक सेतु और हमारी साझा विरासत को अत्यंत प्रामाणिकता से प्रस्तुत करती है।"

- डॉ. कित्तिपोंग बुनकर्ड, चुलालोंकॉन विश्वविद्यालय, थाईलैंड

Product Details
ISBN 13 9788169720328
Book Language Hindi
Binding Paperback
Publishing Year 2026
Total Pages 268
Edition First
GAIN J7PXOLHCTMK
Publishers Garuda Prakashan Pvt Ltd  
Category History  
Weight 270.00 g
Dimension 14.00 x 22.00 x 1.70

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-:किताब के बारे में:-

रामायण केवल एक महाकाव्य नहीं, बल्कि एशिया की सांस्कृतिक स्मृति का एक जीवंत और गतिशील हिस्सा है। भारत से दक्षिण-पूर्व एशिया तक इसकी यात्रा ने विभिन्न समाजो की कला, साहित्य, नृत्य, रंगमंच, लोकपरंपराओं, धार्मिक आस्थाओं और सांस्कृतिक विरासत को गहराई से प्रभावित किया है।

रामायण की पदचाप इसी व्यापक सांस्कृतिक यात्रा का अध्ययन प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक थाईलैंड, इंडोनेशिया, कंबोडिया, लाओस ओर दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य क्षेत्रों में रामकथा के विविध रूपों और स्थानीय रूपांतरणों को सामने लाती है। यहाँ रामायण किसी एक स्थिर कथा के रूप में नहीं, बल्कि स्थानीय समाजों द्वारा निरंतर पुनसृजित और आत्मसात की गई जीवंत परंपरा के रूप में दिखाई देती है।

भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच सदियों से विकसित सांस्कृतिक संवाद, साझा विरासत तथा पारस्परिक प्रभावों की गहन पड़ताल करते हुए, यह पुस्तक व्यापक और समग्र परिप्रेक्ष्य सामने लाता है।

"यह एक एक उत्कृष्ट और अत्यंत रोचक पुस्तक है, जो सरल एवं प्रवाहपूर्ण शैली में दक्षिण-पूर्व एशिया में रामायण की अ‌द्भुत यात्रा को प्रस्तुत करती है। इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, म्यांमार और वियतनाम की दुर्लभ रामायण परंपराओं को यह पुस्तक सुंदर ढंग से सामने लाती है।"

- डॉ. यू-तैन वोंगसाथित, सिलपाकोर्न विश्वविद्यालय, थाईलैंड

"इस विषय-वस्तु के प्रति आपकी अत्यंत व्यक्तिगत और आत्मीय प्रतिक्रिया ताज़गीपूर्ण है तथा विद्वत्तापूर्ण प्रकाशनों के पारंपरिक दृष्टिकोण से बिल्कुल अलग है।"

- प्रो. जे. एल. ब्रॉकिंगटन, एडिनबर्ग विश्वविद्यालय, स्कॉटलैंड

"यह पुस्तक भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच रामायण द्वारा निर्मित अटूट सांस्कृतिक सेतु और हमारी साझा विरासत को अत्यंत प्रामाणिकता से प्रस्तुत करती है।"

- डॉ. कित्तिपोंग बुनकर्ड, चुलालोंकॉन विश्वविद्यालय, थाईलैंड

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