My Cart
-:किताब के बारे में:-
मानव चरित्र के सर्वोत्तम उत्कर्ष को दर्शाता महर्षि वाल्मीकि प्रणीत यह आदि काव्य श्रीमद्वाल्मीकीय रामायणम् एक अद्वितीय ग्रंथ है जिसमें मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का चरित्र एक मानव के रूप में वर्णित किया गया है जो यह संदेश देता है कि मानव के लिए ऐसा आदर्श और अनुकरणीय जीवन जीना दुखकर भले ही हो परन्तु असम्भव नहीं है। महर्षि वाल्मीकि श्रीराम के समकालीन थे। देवर्षि नारद से पूछने पर कि इस समय संसार में सबसे गुणवान कौन है, देवर्षि नारद उन्हें श्रीराम के विषय में बताते हैं जो यह सिद्ध करता है कि वे श्रीराम के समकालीन थे। महर्षि वाल्मीकि ने श्रीराम और उनके भाइयों के जन्म नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति का वर्णन किया है। इन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति की ज्योतिषीय गणना कर रामायण काल के समय का भी आकलन किया जा सकता है, जो सम्भवतः अब से करीब सात हजार वर्ष से अधिक पूर्व का है।
यह पुस्तक महर्षि वाल्मीकि रचित रामायण को साधारण जन जन की भाषा में काव्यरूप में प्रस्तुत करने का एक प्रयास है। इस प्रस्तुति में वाल्मीकीय रामायण के उन विवरणों को छोड़ दिया गया है जो मूल कथा के प्रवाह के लिए अत्यन्त आवश्यक नहीं थे। वाल्मीकीय रामायण में छः काण्ड हैं यथा बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड और युद्धकाण्ड और प्रत्येक काण्ड अनेक सर्गों में विभाजित है। इस अनुवाद में विषय और कविता का प्रवाह बनाए रखने के लिए अधिकतर कई सर्गों को एक साथ प्रस्तुत किया गया है। महर्षि विश्वामित्र और ऋषि अगस्त्य द्वारा श्रीराम को दिए गए दिव्य अस्त्र जिनसे उन्हें अजेय बनाने में सहायता की, उनका नाम भी इस पुस्तक में दिया गया है। श्रीराम-रावण के युद्ध का विशद वर्णन और रामराज्य की कुछ विशेषताएँ भी इस पुस्तक में दी गयी हैं।
| ISBN 13 | 9788199438699 |
| Book Language | Hindi |
| Binding | Paperback |
| Publishing Year | 2025` |
| Total Pages | 196 |
| Edition | First |
| GAIN | DQ5TCKT32RO |
| Publishers | Garuda Prakashan |
| Category | Religion & Spirituality Hinduism |
| Weight | 200.00 g |
| Dimension | 15.50 x 23.00 x 1.20 |
Add a Review
-:किताब के बारे में:-
मानव चरित्र के सर्वोत्तम उत्कर्ष को दर्शाता महर्षि वाल्मीकि प्रणीत यह आदि काव्य श्रीमद्वाल्मीकीय रामायणम् एक अद्वितीय ग्रंथ है जिसमें मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का चरित्र एक मानव के रूप में वर्णित किया गया है जो यह संदेश देता है कि मानव के लिए ऐसा आदर्श और अनुकरणीय जीवन जीना दुखकर भले ही हो परन्तु असम्भव नहीं है। महर्षि वाल्मीकि श्रीराम के समकालीन थे। देवर्षि नारद से पूछने पर कि इस समय संसार में सबसे गुणवान कौन है, देवर्षि नारद उन्हें श्रीराम के विषय में बताते हैं जो यह सिद्ध करता है कि वे श्रीराम के समकालीन थे। महर्षि वाल्मीकि ने श्रीराम और उनके भाइयों के जन्म नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति का वर्णन किया है। इन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति की ज्योतिषीय गणना कर रामायण काल के समय का भी आकलन किया जा सकता है, जो सम्भवतः अब से करीब सात हजार वर्ष से अधिक पूर्व का है।
यह पुस्तक महर्षि वाल्मीकि रचित रामायण को साधारण जन जन की भाषा में काव्यरूप में प्रस्तुत करने का एक प्रयास है। इस प्रस्तुति में वाल्मीकीय रामायण के उन विवरणों को छोड़ दिया गया है जो मूल कथा के प्रवाह के लिए अत्यन्त आवश्यक नहीं थे। वाल्मीकीय रामायण में छः काण्ड हैं यथा बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड और युद्धकाण्ड और प्रत्येक काण्ड अनेक सर्गों में विभाजित है। इस अनुवाद में विषय और कविता का प्रवाह बनाए रखने के लिए अधिकतर कई सर्गों को एक साथ प्रस्तुत किया गया है। महर्षि विश्वामित्र और ऋषि अगस्त्य द्वारा श्रीराम को दिए गए दिव्य अस्त्र जिनसे उन्हें अजेय बनाने में सहायता की, उनका नाम भी इस पुस्तक में दिया गया है। श्रीराम-रावण के युद्ध का विशद वर्णन और रामराज्य की कुछ विशेषताएँ भी इस पुस्तक में दी गयी हैं।
| ISBN 13 | 9788199438699 |
| Book Language | Hindi |
| Binding | Paperback |
| Publishing Year | 2025` |
| Total Pages | 196 |
| Edition | First |
| GAIN | DQ5TCKT32RO |
| Publishers | Garuda Prakashan |
| Category | Religion & Spirituality Hinduism |
| Weight | 200.00 g |
| Dimension | 15.50 x 23.00 x 1.20 |
Add a Review
Garuda Prakashan
₹389.00
Garuda Prakashan
₹389.00