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-:किताब के बारे में:-
बसंत आने तक स्त्री मन के अनेक आवरणों का झरोखा है। यह एक अनवरत प्रतीक्षा है, जब हमारे कई प्रश्नो में से कुछ के उत्तर मिल पाएंगे। मैंने हमेशा यह पाया है कि स्त्री को सहायक ही माना जाता रहा है, वह चाहे कितनी भी विशिष्ट हो जाए। उसे महिमामंडित कर ऊँचे आसन पर बिठा अवश्य दिया जाता है किन्तु अपेक्षा उससे यही की जाती है कि वह समाज के नियमों को अपने कन्धों पर ढोती रहे। उसके कर्तव्य तो समाज स्वतः निर्धारित कर दिया करता है पर अधिकारों की बात गौण ही रहती है। मेरे शब्दों में ये गौण प्रश्न हैं, इनके उत्तर जब तक मिलें तब तक बसंत के आगमन की आशा में छंद गढ़े जाते रहेंगे...
| ISBN 13 | 9789347691843 |
| Book Language | Hindi |
| Binding | Paperback |
| Publishing Year | 2026 |
| Total Pages | 60 |
| Edition | First |
| GAIN | H6OFLBMFULO |
| Publishers | Rati : An Imprint Of Garuda Prakashan |
| Category | Literature & Fiction Poetry |
| Weight | 150.00 g |
| Dimension | 13.00 x 21.00 x 0.50 |
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-:किताब के बारे में:-
बसंत आने तक स्त्री मन के अनेक आवरणों का झरोखा है। यह एक अनवरत प्रतीक्षा है, जब हमारे कई प्रश्नो में से कुछ के उत्तर मिल पाएंगे। मैंने हमेशा यह पाया है कि स्त्री को सहायक ही माना जाता रहा है, वह चाहे कितनी भी विशिष्ट हो जाए। उसे महिमामंडित कर ऊँचे आसन पर बिठा अवश्य दिया जाता है किन्तु अपेक्षा उससे यही की जाती है कि वह समाज के नियमों को अपने कन्धों पर ढोती रहे। उसके कर्तव्य तो समाज स्वतः निर्धारित कर दिया करता है पर अधिकारों की बात गौण ही रहती है। मेरे शब्दों में ये गौण प्रश्न हैं, इनके उत्तर जब तक मिलें तब तक बसंत के आगमन की आशा में छंद गढ़े जाते रहेंगे...
| ISBN 13 | 9789347691843 |
| Book Language | Hindi |
| Binding | Paperback |
| Publishing Year | 2026 |
| Total Pages | 60 |
| Edition | First |
| GAIN | H6OFLBMFULO |
| Publishers | Rati : An Imprint Of Garuda Prakashan |
| Category | Literature & Fiction Poetry |
| Weight | 150.00 g |
| Dimension | 13.00 x 21.00 x 0.50 |
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Rati : An Imprint Of Garuda Prakashan
₹139.00
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