शुचि अपना परिचय कुछ इस प्रकार देती हैं- मिट्टी से जन्मी, मिट्टी से जुड़ी, मिट्टी में खेलती, मिट्टी का उपयोग करती एक प्रकृति प्रेमी हैं। खरपतवार से जैविक खाद बनाकर उस खाद के उपयोग से पेड़ पौधे उगाती बागबानी की शौकीन शुचि भौगोलिक परस्थितियों के अनुकूल बगिया सजाती, बीज बोती, सब्जी उगाती और उनको लोगों के साथ साझा करती हैं।
विदेश में रहने वाली शुचि आधुनिकता और परम्परा के बीच अपनी पहचान ढूंढती और उसके साथ सामंजस्य बिठाती एक भारतीय हैं जो निरंतर पढ़ने लिखने और सीखने में यकीन रखती हैं।
शाकाहार का विस्तृत अर्थ बताती शुचि लेखक के रूप में भी जानी जाती हैं और इस विषय पर शोध करके स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन विधियाँ विकसित करने पर काम करती हैं। उनकी पुस्तकें 1-स्वाद सेहत और शाकाहार- आयुर्वेद से आजतक और 2-Health, Taste, and Traditions: A vegetarian journey from Ayurveda to modern times को काफी पसंद किया गया है। शाकाहार स्वास्थ्य, और बागवानी जैसे विषयों पर वे अपनी वेबसाइट शुचि की रसोई पर भी हिन्दी और अंग्रेजी में लिखती हैं।
ईश्वर की बनायी हर कृति को समझने में प्रयासरत शुचि समाज के साथ जुड़कर समाज के लिए काम करने में भी संलग्न रहती हैं।