Sayanacharya (also known as Sayana, c. 14th century, d. 1387) was a minister and subsequently prime minister in the court of King Bukka Raya I of the Vijayanagara Empire. A prolific Sanskrit scholar, more than a hundred works are attributed to him, including extensive commentaries on the Vedas that opened those ancient texts to later readers. His Madhaviya Dhatuvritti (माधवीयधातुवृत्तिः), a commentary on the Dhatupatha of Panini dealing with Sanskrit verbal roots, is among his grammatical contributions. The present edition is published by Chaukhambha Publications.
सायणाचार्यः (सायणः इत्यपि ज्ञातः, लगभगं चतुर्दशशतकः, मृत्युः १३८७) विजयनगरसाम्राज्ये राजबुक्करायस्य प्रथमस्य सभायां मन्त्री तथा अनन्तरं प्रधानमन्त्री च आसीत्। सः विपुलः संस्कृतपण्डितः, यस्मै शतातिरिक्ताः कृतयः आरोप्यन्ते, येषु वेदानां विस्तृताः भाष्याः सन्ति ये तान् प्राचीनग्रन्थान् परवर्तिभ्यः पाठकेभ्यः उद्घाटयन्ति। पाणिनेः धातुपाठस्य संस्कृतधातुविषयकी माधवीयधातुवृत्तिः तस्य वैयाकरणकृतिषु अन्यतमा। एतत् संस्करणं चौखम्भा पब्लिकेशन्सेन प्रकाशितम् अस्ति।
सायणाचार्य (सायण के नाम से भी ज्ञात, लगभग चौदहवीं शताब्दी, मृत्यु १३८७) विजयनगर साम्राज्य में राजा बुक्क राय प्रथम की सभा में मन्त्री और तत्पश्चात् प्रधानमन्त्री थे। वे एक विपुल संस्कृत पण्डित थे, जिन्हें सौ से अधिक कृतियाँ सम्बद्ध हैं, जिनमें वेदों पर विस्तृत भाष्य हैं जिन्होंने उन प्राचीन ग्रन्थों को परवर्ती पाठकों के लिए सुलभ बनाया। पाणिनि के धातुपाठ पर संस्कृत धातुओं की विवेचना करने वाली उनकी माधवीयधातुवृत्तिः उनकी वैयाकरण कृतियों में से एक है। यह संस्करण चौखम्भा पब्लिकेशन्स द्वारा प्रकाशित है।