जब उनका पहला उपन्यास "दर्द " प्रकाशित हुआ तो वे मात्र 19 वर्ष के थे। 43 वर्ष की आयु में यह उनकी 28 वीं किताब है। साहित्य की लगभग सभी विधाओं में वे बीते 25 वर्ष से सक्रिय हैं । राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक, राजनितिक और आर्थिक विषयों के साथ - साथ बच्चे और युवा उनके लेखन के केंद्र में हैं । उनके लेखन के सिल्वर जुबली वर्ष में " पाती चाचा " उनका पहला कहानी संग्रह है। देश की कई पत्र - पत्रिकाओं में उनके 300 से अधिक लेख , कविताऐं , गजलें प्रकाशित हो चुकी हैं । उत्तर प्रदेश सरकार उन्हें 2 बार सम्मानित कर चुकी है। कई प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्थाएं भी उन्हें कई बार पुरुष्कृत कर चुकी हैं । प्रसिद्ध क्रिकेट पत्रिका " क्रिकेट टुडे " के लिए उन्होंने 10 वर्ष से अधिक समय तक क्रिकेट समीक्षक का कार्य भी किया है। एक अंतर्राष्ट्रीय व्यंग्य संग्रह और साझा काव्य संग्रह " मशाल " में भी उनकी रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं ।